द आर्ट ऑफ लिविंग हॉलिस्टिक लाइफ विषय पर उद्बोधन से  CA हेमंत लोढ़ा ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

नागपुर, 7 जुलाई. रविवार की शाम, नागपुर फर्स्ट संस्था की ओर से ग्लोबल लीडरशिप टाक के अंतर्गत द आर्ट ऑफ लिविंग हॉलिस्टिक लाइफ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में जाने—माने समाजसेवी, विचारक और उद्यमी सीए हेमंत लोढ़ा ने श्रोताओं को समग्रता के साथ सुखी जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया. 

उनके संबोधन से पूर्व डॉ. विवेक नानोटी ने नागपुर फर्स्ट की विकास यात्रा के बारे में विस्तार से बताया  कि किस तरह से डेढ़ दशक पहले तीन उत्साही युवाओं द्वारा आरंभ की गई यह संस्था आज ग्लोबल ब्रांड बन चुकी है. उन्होंने संस्था की ओर से हर साल आयोजित की जाने वाली ग्लोबल नागपुर समिट, लीडरशिप टाक, इनोवेटर अवार्ड जैसी सिग्नेचर इवेंट की भी जानकारी दी.नागपुर फर्स्ट के इं​डिया चेयर तनवीर मिर्जा ने अपने प्रभावशाली अंदाज में मुख्य वक्ता हेमंत लोढ़ा जी का परिचय देते हुए अपील की  कि आज हमें एक टेक होम मैसेज लेकर जाना है.  

हेमंत लोढ़ा ने श्रोताओं के साथ खुलकर अपनी पचास सालों की कामयाब उद्योग जगत, प्रवास, व्यक्तिगत, सामाजिक, आध्यात्मिक, और रचनात्मक यात्रा के अनुभव साझा किए. अपने उद्बोधन का आरंभ श्री लोढ़ा ने खुशी की विस्तृत व्याख्या के साथ किया. उन्होंने कहा कि विषम हालात में भी अच्छा महसूस करना, सभी प्राणियों से प्रेम, दूसरों का ख्याल रखना, जो किया जाना जरूरी है, उसे करना... यही खुशी है. उन्होंने कहा कि अपनी मेधा का विस्तार करते हुए सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना चाहिए, क्योंकि हमारे विचार जितने बेहतर होंगे, हमारा जीवन उतना ही बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि हम जो भी निर्णय लें, उसके बारे में स्वयं से यह अवश्य पूछें कि क्या इससे सभी संबंधित पक्षों को खुशी मिलेगी. श्री लोढ़ा ने कहा कि भारतीय दर्शन में पुरुषार्थ के चार ध्येय धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष बताए गए हैं. और ब्रह्मचार्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, संन्यास आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम, इन आश्रमों की संख्या भी चार ही है. इन चारों आश्रमों से शालीनता के साथ गुजरते हुए चारों लक्ष्यों को हासिल करना ही जीवन को सम्पूर्ण बना सकता है.

इस अवसर पर श्री लोढ़ा ने क्या फर्क पड़ता है विषय पर अपनी एक कविता भी पढ़कर सुनाई, जिससे सहमति जताते हुए श्री पारिख ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में लोगों का एक दूसरे पर भरोसा खत्म होता जा रहा है, जिसे फिर से जिंदा करने की बहुत जरूरत है. उन्होंने कहा कि हम सभी को स्वयं से यह प्रश्न अवश्य करना चाहिए कि मैं दूसरों के लिए क्या कर सकता हूॅं. 

मुख्य वक्ता श्री लोढ़ा के अतिरिक्त नागपुर फर्स्ट की कार्याकारिणी के जयप्रकाश पा​रिख, संजय अरोड़ा, डॉ.रिजवान अहमद, मनोहर भोजवानी, अमिताभ खन्ना, अमित येनुरकर, रश्मि बंसल, आशीष सहस्त्रबुद्धे,डॉ. अमिशि अरोड़ा, डॉ. अनिता राव तथा नागपुर फर्स्ट के एडवाइजर डॉ. कमल सिंह,डॉ.टी.एस.भाल, सुनीला सहस्त्रबुद्धे, डॉ. सी वी चलपतिराव भी कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. विशिष्ट अतिथियों में भारत में माल्टा के कॉरेस्पोंडेंट डिप्लोमेट अफजल मीठा, नागपुर विश्वविद्यालय के डॉ. अभय देशमुख, मोटिवेशनल स्पीकर व मैनेजमेंट गुरु डॉ. विवेक नानोटी, नेशनल एकेडमी आॅफ डिफेंस प्रोडक्शन के जे पी डैश, डॉ. आशुतोष पातुरकर, इन्फोसिस के राहुल करंगाले, अंबरीश गटाटे, टीएलसी के संदीप दार्वेकर शामिल थे. 

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों में तन्मय पटले, डॉ. शब्बीर जकारिया, मधु सिंघी, मीतल भट, रीमा चड्ढा सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, समाजसेवी, नवउद्यमी और विद्यार्थी उपस्थित ​थे. सभी ने इस आयोजन की दिल खोलकर सराहना की.

ग्लोबल लीडरशिप टाक कार्यक्रम का संचालन तुषार पारीख ने और आभार प्रदर्शन आशीष सहस्त्रबुद्धे ने किया.

कविता का वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:  click here