हिंदू-मुस्लिम दरगाह और मंदिर जाकर एक साथ मनाते हैं उत्सव
नई दिल्ली । दिल्ली के महरौली में एक अनोखा त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाते हैं। इस त्योहार को फूल वालों की सैर के नाम से जाना जाता है। जहां एक तरफ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द, महान सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर फूलों की चादर चढ़ाई जाती है, तो वहीं दूसरी तरफ इलाके में ही स्थित श्रीयोग माया मंदिर पर फूलों का पंखा और छत्र चढ़ाया जाता है। बता दें कि दोनों मौकों पर हिंदू- मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मौजूद रहते हैं। जिस तरह धूम-धाम से ईद और दिवाली मनाई जाती है, बिल्कुल उसी तरह फूल वालों की सैर को भी सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल 20 से 26 अक्टूबर तक फूल वालों की सैर जश्न मनाया गया।
क्या है फूल वालों की सैर?
महरौली इलाके में होने वाला फूल वालों की सैर सदियों पुराना त्योहार है। यह मॉनसून के बाद और सर्दी शुरू होने से ठीक पहले मनाया जाता है। यह मुगलों के दौर से चला आ रहा एक ऐसा त्योहार है, जो सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब की गवाही देता है। फूल वालों की सैर को आयोजित करने की ज़िम्मेदारी अंजुमन सैर-ए-गुल फरोसां उठाती है, जो खास इसी के लिए बनाई गई एक कमेटी है। हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग परंपरा के मुताबिक, मंदिर और दरगाह पर तो जाते ही हैं, साथ ही इस एक सप्ताह के सेलिब्रेशन में कई और तरह की एक्टिविटीज भी शामिल हैं।
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