पश्चिम अफ्रीका के माली में बड़ा आतंकी हमला, कई लोग मारे गए
बमाको: पश्चिमी अफ्रीकी देश माली इस समय भीषण जिहादी हिंसा और अस्थिरता के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन 'जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन' (JNIM) द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों में अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्थानीय सूत्रों का अंदेशा है कि यह संख्या 80 के पार जा सकती है। आतंकियों ने उन निर्दोष ग्रामीणों को निशाना बनाया है जिन्होंने उनके द्वारा थोपे गए समझौतों को मानने से इनकार कर दिया था।
जेल पर धावा और राजधानी की घेराबंदी
माली की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब पैदा हुई जब हथियारबंद लड़ाकों ने राजधानी बामको से मात्र 60 किलोमीटर दूर स्थित 'केनीरोबा सेंट्रल जेल' पर हमला बोल दिया। इस जेल में करीब 2,500 कैदी बंद हैं, जिनमें दर्जनों खूंखार आतंकी भी शामिल हैं। इस घटना के बाद जेएनआईएम ने बामको की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर चेकपॉइंट बनाकर शहर की पूर्ण आर्थिक और सैन्य घेराबंदी करने की चेतावनी दी है, जिससे सरकार और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
सेना की भूमिका पर बढ़ता जन आक्रोश
लगातार होती मौतों और सेना की कथित निष्क्रियता ने स्थानीय आबादी के गुस्से को भड़का दिया है। ग्रामीणों और युवा नेताओं का आरोप है कि पास में सैन्य टुकड़ियों की मौजूदगी के बावजूद, समय पर मदद नहीं पहुंची, जिससे आतंकियों को कत्लेआम मचाने का अवसर मिला। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जेएनआईएम और तुआरेग-बहुल 'अजावाद लिबरेशन फ्रंट' के बीच हुए नए गठबंधन ने आतंकी संगठनों की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे देश की सुरक्षा दीवार ढहती नजर आ रही है।
रणनीतिक झटके और नेतृत्व संकट
सैन्य मोर्चे पर माली की स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हालिया संघर्षों में देश के रक्षा मंत्री की मौत हो गई। इसके अतिरिक्त, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर 'किडल' से रूसी सैनिकों का पीछे हटना सेना के मनोबल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि सैन्य कमांडर विद्रोहियों के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन राजधानी के इतने करीब बढ़ती आतंकी गतिविधियां इन सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं।
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