सार्थक करेगा स्टूडेंट्स की उपस्थिति की निगरानी, नई व्यवस्था लागू
जबलपुर: मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। करीब 40 साल के लंबे इंतजार के बाद किए जा रहे इन बड़े नीतिगत सुधारों को राज्य सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है। नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का 100 प्रतिशत डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पढ़ाई, ऐप के जरिए ऑनलाइन अटेंडेंस और छात्रों की अनूठी डिजिटल शैक्षणिक पहचान जैसे हाईटेक प्रावधान लागू किए जाएंगे। इस फैसले से सूबे के कॉलेजों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा।
परीक्षा पैटर्न में बदलाव: अब रटने पर नहीं, कौशल (Skill) पर होगा जोर
वर्तमान में लागू परीक्षा प्रणाली में 30 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) और 70 प्रतिशत अंक मुख्य लिखित परीक्षा के लिए निर्धारित हैं। शिक्षा विभाग अब इस अनुपात को बदलकर 40:60 करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
व्यक्तित्व विकास को मिलेगी रफ्तार:
आंतरिक मूल्यांकन का वेटेज बढ़ने से छात्र केवल साल के अंत में होने वाली रट्टा-मार वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे। अब उनका मूल्यांकन प्रोजेक्ट वर्क, क्लास प्रेजेंटेशन, प्रैक्टिकल और सेमिनार जैसी गतिविधियों के आधार पर होगा, जिससे छात्रों के भीतर व्यावहारिक ज्ञान और कौशल का विकास हो सकेगा।
डिजिटल क्रांति के तीन मुख्य स्तंभ: AI, अपार आईडी और ऑनलाइन अटेंडेंस
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को पूरी तरह हाईटेक और पारदर्शी बनाने के लिए तीन बड़े फैसले लिए हैं:
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67 पीएमश्री कॉलेजों में एआई कोर्स: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भविष्य की जरूरत मानते हुए विभाग ने इसी सत्र से प्रदेश के 67 पीएमश्री उत्कृष्ट महाविद्यालयों में एआई-आधारित सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इसमें छात्रों को आधुनिक एआई टूल्स के रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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विद्यार्थियों की बनेगी 'अपार आईडी' (APAAR ID): स्कूल शिक्षा की तर्ज पर अब कॉलेज के छात्रों के लिए भी 'अपार आईडी' अनिवार्य की जा रही है। यह एक वन-नेशन, वन-स्टूडेंट डिजिटल पहचान होगी, जिससे छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड, कॉलेज एडमिशन, अंकसूची (मार्क्सशीट) और डिग्री सर्टिफिकेट एक ही सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगे।
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'सार्थक ऐप' से लगेगी हाईटेक हाजिरी: कॉलेजों में छात्रों और प्रोफेसरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभाग 'सार्थक ऐप' आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को पूरी तरह अनिवार्य करने जा रहा है। इस तकनीक के लागू होने से कक्षाओं से बंक मारने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनेगी।
वैश्विक अवसरों से जुड़ेंगे मध्य प्रदेश के छात्र
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप वैश्विक मानकों के समकक्ष लाना है। उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल मूल्यांकन से न केवल रिजल्ट समय पर आएंगे, बल्कि कॉपियों की जांच में होने वाली मानवीय गलतियों और पक्षपात की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ये सुधार प्रदेश के युवाओं के स्वर्णिम और तकनीक-सक्षम भविष्य की नींव रखेंगे।
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