NHRC ने कथित अनियमितताओं पर लिया संज्ञान
कटनी: 165 बच्चों के रेस्क्यू मामले में NHRC की एंट्री; प्रियंक कानूनगो ने उठाए शिक्षा के अधिकार पर गंभीर सवाल
कटनी (मध्य प्रदेश): कटनी रेलवे स्टेशन पर बिहार से लाए गए 165 बच्चों के रेस्क्यू किए जाने के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस पूरे घटनाक्रम को बच्चों के मौलिक अधिकारों और शिक्षा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।
"मक्का-मदीना की संपत्तियां आम लोगों के योगदान से": कानूनगो
प्रियंक कानूनगो ने चर्चा के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मक्का-मदीना जैसी संपत्तियां आम लोगों के योगदान और दान से बनी हैं। उन्होंने इन संपत्तियों को 'शाही' कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सब जनता के सहयोग का परिणाम है।
बच्चों के मौलिक अधिकारों की अनदेखी पर चिंता
मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए:
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दूरी का अधिकार: कानूनगो ने कहा कि कानूनन हर बच्चे का अधिकार है कि वह अपने घर से 1-2 किलोमीटर के दायरे में स्थित स्कूल में शिक्षा प्राप्त करे।
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गैर-शैक्षणिक उद्देश्य: बिहार के बच्चों को इतनी दूर महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में ले जाना 'गैर-शैक्षणिक' उद्देश्यों की ओर इशारा करता है, जो बेहद चिंताजनक है।
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औपचारिक शिक्षा अनिवार्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है, लेकिन यदि इसके कारण बच्चों की नियमित और औपचारिक स्कूली शिक्षा बाधित होती है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा हनन है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार के अररिया जिले से महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में ले जाए जा रहे 163 बच्चों को मध्य प्रदेश के कटनी स्टेशन पर ट्रेन से उतारा गया और रेस्क्यू किया गया।
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कार्रवाई: प्रशासन ने सभी बच्चों को सुरक्षित बालगृह में पहुँचाया।
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कानूनी कदम: इस मामले में बच्चों के साथ मौजूद मदरसा शिक्षकों पर मानव तस्करी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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