पूर्वोत्तर राज्यों ने दिया एकता का संदेश— नितिन गडकरी 

नागपुर, 13अक्टूबर। 'भारत के लिए पूर्वोत्तर के आठों राज्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यद्यपि उनकी भाषा और संस्कृति भिन्न है, फिर भी ‘भाषाएँ अनेक, पर देश हमारा एक’—इस सिद्धांत के अनुरूप एकता का संदेश पूर्वोत्तर के लोगों ने दिया है।' केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कल यहॉं ‘ऑक्टेव’ 2025 उत्सव के समापन अवसर पर व्यक्त किए।  समापन अवसर पर उपस्थित कलाकारों और नागरिकों से संवाद करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि पूर्वोत्तर के हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट्स और बांस से बने उत्पाद पूरे देश में लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि उनके मंत्रीकाल में असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के सड़क विकास कार्य किए गए। इसके साथ ही काजीरंगा से नुमालीगढ़ के बीच एलिवेटेड हाईवे का निर्माण हो रहा है। पहले ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल दो पुल थे, अब उनकी संख्या नौ हो गई है।

ज्ञातव्य है कि पिछले चार दिनों से यहॉं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर) और दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) के संयुक्त तत्वावधान ‘नॉर्थ ईस्ट ऑक्टेव’ महोत्सव आयोजित किया गया था, जिसका भव्य समापन कल रविवार को हुआ।

इस समापन कार्यक्रम में मंच पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहायक निदेशक दुर्गेश चांदवानी, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक डॉ. आस्था कार्लेकर तथा सहायक निदेशक दीपक कुलकर्णी उपस्थित थे।

इस अवसर पर पूरे महोत्सव के कोरियोग्राफर तरुण प्रधान और बांस शिल्प कलाकार मुकेश सायकिया का नितिन गडकरी के हाथों सम्मान किया गया।

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कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर के पारंपरिक नृत्य पुंग ढोल चोलम से हुई, जो सामान्यतः होली पर्व पर प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य के साथ मार्शल आर्ट और थांग-टा युद्धकौशल का भी शानदार प्रदर्शन किया गया। इसके बाद आसाम का पारंपरिक नृत्य सतरिया डांस प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्रीकृष्ण की लीलाओं को संगीत, काव्य और पद-लालित्य के माध्यम से सुंदर रूप में अभिव्यक्त किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में नॉर्थ-ईस्ट रॉक बैंड समूह ने विभिन्न देशभक्ति गीतों का सामूहिक वाद्य और गायन प्रस्तुत किया, जिसकी शुरुआत ए. आर. रहमान के लोकप्रिय गीत ‘वंदे मातरम’ से की गई। 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक अलोणी और मोहिता दीक्षित ने किया।

इससे पूर्व शनिवार को ऑक्टेव महोत्सव के तीसरे दिन पूर्वोत्तर राज्यों से आए लगभग 200 कलाकारों ने सामूहिक नृत्य (फ्यूजन) के माध्यम से अपनी विविध सांस्कृतिक झलक पेश की। इस अद्वितीय प्रस्तुति ने दर्शकों को पूर्वोत्तर की संस्कृति का समग्र अनुभव कराया और कार्यक्रम के अंत में पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इस कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र सिंगल, राज्य सरकार की प्रधान सचिव श्रीमती विनीता सिंगल, सीबीआई के उपनिदेशक हृषीकेश सोनवणे, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहायक निदेशक दुर्गेश चांदवानी तथा द.म.क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के माजी निदेशक डॉ. दीपक खिरवडकर उपस्थित थे। सभी अतिथियों का स्वागत केंद्र की निदेशक डॉ. आस्था कार्लेकर ने किया।

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कलाकारों ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना पर आधारित विविध नृत्य शैलियों के माध्यम से पूर्वोत्तर की संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मणिपुरी रास लीला का मनमोहक नृत्य डॉ. सिनम बासु सिंह और उनके दल ने पेश किया, जिसमें आकर्षक वेशभूषा, सुगठित पदलालित्य और मधुर संगीत का अद्भुत संगम था। इसके बाद असम राज्य की सत्रिया नृत्य शैली का शानदार प्रदर्शन डिंपल सेतिया और उनकी टीम ने किया, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा। यह नृत्य मुख्यतः असम के वैष्णव मठों में लोकप्रिय है।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि मणिपुरी रास में जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की गोपियों संग रास लीला प्रस्तुत की गई, वहीं सत्रिया नृत्य में कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर चित्रण किया गया।

इन नृत्य प्रस्तुतियों की कोरियोग्राफी तरुण प्रधान के मार्गदर्शन में अनम महतो और अभिलाष सरकार ने उत्कृष्ट रूप से तैयार की। कार्यक्रम का संचालन किशोर गलांडे और मोहिता दीक्षित ने किया।