जब हमारा देश आजाद हुआ तो इसकी अर्थव्यवस्था प्रमुख रूप से कृषि पर आधारित थी। यहाँ के निवासियों का मुख्य व्यवसाय खेती करना था। कृषि-वानिकी इस व्यवसाय का आज का स्वरूप है जिसे एग्रोफोरेस्टी (agroforestry)के अंतर्गत जाना जाता है। इस लेख के अंतर्गत हम एक बहुत तेजी से बढ़ने वाले और अत्यधिक लाभकारी पतझड़ी वृक्ष पाॅपलर( poplar) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

पाॅपलर की 25-35 प्रजातियाॅ हैं। यह उत्तरी गोलार्द्ध में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम populus( पापुलस)है ।इसकी इन प्रजातियों में 110 वैरायटी अच्छी सिंचाई,उचित देखभाल और खाद मिलने पर 3-4 वर्षों में भी कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। इसकी पौध लगाने के लिए रजिस्टर्ड नर्सरी से पौध व सामग्री लेनी चाहिए। जनवरी-फरवरी माह में इस पौध की नर्सरी बागों में लगानी चाहिए। रोपाई के लिए इसका उचित समय 15फरवरी-10मार्च के लगभग है। लगाते समय उचित दूरी रखने पर इसकी बढ़वार,तने की मोटाई व वृक्ष की लंबाई (ऊँचाई)अधिकतम होती है।

पाॅपलर की रोपाई करने के लिए खेतों में एक मीटर गहरा गड्ढ़ा खोदें।इन गड्ढ़ों में अच्छी तरह गला हुआ गाय का गोबर दो किलोग्राम,म्यूरेट आॅफ पोटाश 25 ग्राम तथा सिंगल सुपर फाॅस्फेट 50 ग्राम लेकर मिट्टी में मिलायें। पौधे को लगाते समय ध्यान रखें कि उसे गड्ढ़े में सीधा रखा जाये व ऊपर को भी उसका तना सीधा रहे ।ऐसा करने से पौधा वृक्ष के रूप में सीधा चलेगा।

पहले साल प्रति 15 दिनों बाद नीचे से तीन मीटर तक आँखें तोड़ते रहें। दूसरे-तीसरे साल जनवरी माह में उलझी हुई टहनियाॅ निकाल दें। चौथे साल मई व अगस्त में दो बार निराई करें ।पाँचवे-छठे साल नीचे से एक-तिहाई व नीचे से ही पेड़ के आधे हिस्से से टहनियाँ छाॅट दें। इस वृक्ष की लंबाई 50 मीटर तक हो जाती है।हरियाणा में जगाधरी,यमुनानगर में इसकी एशिया की सबसे बड़ी मण्डी है।

पॉंच साल में एक पाॅपलर वृक्ष का वजन 3-4 कुंटल तक हो जाता है। बाजार में इसकी लकड़ी ₹1000/-से ₹1200/-प्रति कुंटल तक बिक जाती है। इस प्रकार किसान के लिए इसकी खेती करना मुनाफे का सौदा कहा जाता है। इसको किसानों की एफडी (fixed deposit) फसल भी कहा जाता है। पाॅपलर की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से प्लाईवुड,फर्नीचर,बोर्ड,माचिस की तीलियाँ, स्पोर्ट्स का सामान और पेंसिल आदि बनाने में किया जाता है। 
(image : Gemini Ai)                             

डाॅ. सुमित अग्रवाल
52,मौहल्ला-सोसायटी,मण्डी धनौरा-244231,जिला-अमरोहा,उत्तर प्रदेश