सांस्कृतिक वैभव का बना जीवंत उत्सव
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का “कला महोत्सव” सांस्कृतिक वैभव का बना जीवंत उत्सव
पद्मश्री डॉ. भारती बंधु के कबीर गायन से सजी आध्यात्मिक संध्या
मंच पर उतरे कृष्ण, डॉ. नितीश भारद्वाज ने किया एक युग को जीवंत
नागपुर, 18 मार्च। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 13 एवं 14 मार्च को आयोजित दो दिवसीय “कला महोत्सव” सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और रंगमंचीय उत्कृष्टता का अद्भुत संगम बनकर उभरा। केंद्र परिसर में आयोजित इस महोत्सव ने संगीत, नाटक और लोकसंस्कृति के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहराई से परिचित कराया।
महोत्सव का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. भारती बंधु, केंद्र की सहायक संचालक (कार्यक्रम) श्री दीपक कुलकर्णी तथा प्रशासकीय अधिकारी श्री दीपक पाटिल द्वारा दीपप्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर केंद्र की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर ने “सेवा पर्व” चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों एवं सहभागियों को पुरस्कार प्रदान किए।

कार्यक्रम की शुरुआत खजुराहो में आयोजित नाट्य कार्यशाला में तैयार नाटक “भरत मिलाप” से हुई। बुंदेली भाषा में प्रस्तुत इस नाट्य प्रस्तुति ने बुंदेलखंड की पारंपरिक लोकनृत्य एवं लोकगायन परंपरा की सुंदर झलक मंच पर प्रस्तुत की। रामायण के भावपूर्ण प्रसंग — श्रीराम और भरत के मिलन — को कलाकारों ने संवेदनात्मक अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया। नाटक में भरत की भूमिका राहुल आदिवासी, श्रीराम की भूमिका सनी मोहम्मद और लक्ष्मण की भूमिका गणेश रजक ने निभाई। निर्देशन लोकेंद्र त्रिवेदी एवं निशा त्रिवेदी का रहा, जबकि पटकथा राजेंद्र त्रिवेदी द्वारा लिखी गई। संगीत संयोजन इंद्रजीत दीक्षित और बेबी प्रजापति ने किया।

महोत्सव की अगली प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक पद्मश्री डॉ. भारती बंधु के कबीर गायन की रही, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया। उन्होंने ‘राम बिना कछु नाही’ भजन से शुरुआत करते हुए “जरा धीरे-धीरे गाड़ी हांको मोरे राम गाड़ीवाले” सहित कई रचनाओं की प्रस्तुति दी। तबले पर अनुभव भारती, ढोलक पर मुक्तक भारती, ऑक्टापैड पर संयम भारती, बेंजो पर मिथेश फरीकर तथा कुंजी पर अभिषेक यादव ने संगत की। सहगायन में गोपी भारती, पावस भारती और विद्रुम्ना भारती शामिल रहे।

महोत्सव के दूसरे दिन हिंदी महानाट्य “चक्रव्यूह” का प्रभावशाली मंचन हुआ, जिसे अतुल सत्य कौशिक ने लिखा और निर्देशित किया। इस प्रस्तुति में महाभारत के 13वें दिन अभिमन्यु वध की घटना को दार्शनिक दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए युद्ध, कर्म और धर्म के शाश्वत प्रश्नों को आधुनिक जीवन से जोड़ा गया।
महाभारत धारावाहिक में श्रीकृष्ण की अमर भूमिका निभाने वाले डॉ. नितीश भारद्वाज ने मंच पर कृष्ण का रूप धारण कर मानो एक युग को पुनर्जीवित कर दिया। उनकी सशक्त अभिनय शैली और संवाद प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उल्लेखनीय है कि “चक्रव्यूह” के अब तक 160 से अधिक सफल मंचन हो चुके हैं।
दोनों दिनों के कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्रीमती श्वेता शेलगांवकर ने किया। महोत्सव में बड़ी संख्या में उपस्थित कलाप्रेमी दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक तालियों से स्वागत किया।
दो दिवसीय “कला महोत्सव” ने यह सिद्ध किया कि भारतीय लोकपरंपरा, भक्ति संगीत और शास्त्रीय रंगमंच आज भी समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
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