32वाँ ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेला बना सांस्कृतिक संगम

नागपुर, 5 अप्रैल। संतरानगरी में होने वाला कला—संस्कृति का विराट उत्सव आज यहॉं सम्पन्न हुआ। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित दस दिवसीय ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेला एवं लोकनृत्य समारोह में सुर, लोककलाओं, हस्तशिल्प के असंख्य रंग बिखरे। 27 मार्च से 5 अप्रैल 2026 तक चले इस मेले में प्रतिदिन हजारों नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समापन दिवस पर उमड़ी भारी भीड़ ने इस आयोजन की लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व को एक बार फिर प्रमाणित किया।

मेले का वातावरण पारंपरिक भारतीय जीवन की विविधता से सराबोर रहा। दोपहर से आरंभ होने वाले क्राफ्ट मेला और फूड ज़ोन में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प वस्तुएँ आकर्षण का केंद्र रहीं। मिट्टी, लकड़ी, वस्त्र, धातु और लोककला आधारित उत्पादों की बिक्री के साथ-साथ लाइव कला निर्माण ने दर्शकों को शिल्प प्रक्रिया से भी परिचित कराया। स्थानीय व्यंजनों के साथ विभिन्न राज्यों के स्वादों ने मेले को एक सांस्कृतिक बाज़ार का रूप दे दिया।

शाम होते ही खुला रंगमंच भारत की लोक परंपराओं का जीवंत मंच बन जाता था। ओडिशा, राजस्थान, असम, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तेलंगाना, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, गोवा और अन्य राज्यों के लोक एवं आदिवासी नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। पारंपरिक वेशभूषा, जीवंत संगीत और लोक लयों ने भारतीय सांस्कृतिक विविधता की अद्भुत झलक प्रस्तुत की। तलवार रास, छाऊ, ढोलु कुनिथा, गेर, रनप्पा और अन्य लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।

मेले की विशेषता केवल नृत्य प्रस्तुतियाँ ही नहीं रहीं, बल्कि विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इसे सामाजिक समावेश का मंच भी बनाया। दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावुक किया, वहीं लोकसंगीत और भजन संध्याओं ने आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। कबीर गायन और महाराष्ट्र के पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति ने भारतीय संत परंपरा और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ा। एक मंच पर विभिन्न सामाजिक वर्गों के कलाकारों की भागीदारी ने समानता और स्वीकार्यता का संदेश भी दिया।

बच्चों और परिवारों के लिए कठपुतली, कच्छी घोड़ी, बाइस्कोप और बहुरूपी कलाकार विशेष आकर्षण बने रहे। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई देता रहा, जहाँ कला केवल प्रदर्शन नहीं बल्कि अनुभव बन गई।

सुगठित व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक विविधता और जनसहभागिता के कारण यह आयोजन नागपुर के सांस्कृतिक कैलेंडर का प्रमुख आकर्षण सिद्ध हुआ। निरंतर 32 वर्षों से आयोजित हो रहा यह मेला न केवल कलाकारों और शिल्पकारों को मंच प्रदान करता है, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन चुका है।

इस वर्ष का आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि परंपरा और आधुनिक समाज के बीच संवाद तभी संभव है, जब संस्कृति उत्सव बनकर जन-जन तक पहुँचे — और ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेला इसी संवाद का सफल उदाहरण बनकर उभरा।

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