नागपुर में रविवार को होगा “ताल उत्सव”
सायंटिफिक सभागृह में शास्त्रीय नृत्य और तबला वादन की विशेष संध्या
नागपुर,7 जनवरी। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) तथा ताल साधना समूह संस्था, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में 11 जनवरी 2026, रविवार को सायं 6.00 बजे “ताल उत्सव” का आयोजन सायंटिफिक सभागृह, लक्ष्मीनगर, नागपुर में किया जा रहा है। यह उत्सव नागपुर के सुप्रसिद्ध तबला वादक स्व. पं. प्रभाकरराव देसाई की स्मृति को समर्पित रहेगा। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन श्रीमती श्वेता शेलगांवकर करेंगी।
कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्य की जुगलबंदी से होगी। इस अवसर पर सांगली की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना श्रीमती पूर्वा कवठेकर–दीक्षित एवं पुणे के बाल कलाकार मल्लिकार्जुन संयुक्त प्रस्तुति देंगे। तबले पर किशोर कोरडे, संवादिनी पर सुधीर टेकाळे तथा गायन में प्रशांत नायकवडी संगत करेंगे।
कथक साधिका पूर्वा कवठेकर–दीक्षित पुणे स्थित लयशाला ललित कला फाउंडेशन में अतिरिक्त निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वे पिछले नौ वर्षों से बच्चों, युवाओं और महिलाओं को कथक शिक्षण प्रदान कर रही हैं तथा कला उत्सवों के आयोजन और एक्सप्रेसिव मूवमेंट थेरेपी के माध्यम से भावनात्मक जागरूकता एवं तनाव प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रही हैं। देशभर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर उनकी प्रस्तुतियाँ सराही गई हैं।
पुणे के 14 वर्षीय प्रतिभाशाली कथक नर्तक मल्लिकार्जुन ने अल्प आयु में ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की केंद्रीय कनिष्ठ छात्रवृत्ति प्राप्त है। उन्होंने उज्जैन, इंदौर, कालहस्ती, हैदराबाद और तिरुमला सहित अनेक मंचों पर प्रस्तुति दी है। ब्रिलियंट अवॉर्ड (पुणे सिटी तमिल संगम, 2024), अमृत्योत्सव द्वितीया 2022 (जबलपुर) में प्रथम पुरस्कार तथा कथक में ‘नृत्य भूषण’ उपाधि उनके प्रमुख सम्मान हैं। वे अपनी गुरु श्रीमती आस्था कार्लेकर के मार्गदर्शन में निरंतर साधना कर रहे हैं।
कार्यक्रम की द्वितीय प्रस्तुति “ताल अर्पण” होगी, जिसमें राम पनके, ओम कुकडे, शौर्य दुधनकर, मंदार मुडे और श्रेयस मुंजे द्वारा तबला वादन प्रस्तुत किया जाएगा। लहरा संगत विनय ढोक करेंगे। यह प्रस्तुति स्व. पं. प्रभाकरराव देसाई की सांगीतिक परंपरा को उनके शिष्यों के शिष्यों द्वारा आगे बढ़ाने का प्रतीक होगी, जो गुरु-शिष्य परंपरा की सशक्त निरंतरता को दर्शाती है।

(यशवंत वैष्णव)
उत्सव की अंतिम प्रस्तुति एकल तबला वादन की होगी, जिसमें मुंबई के सुप्रसिद्ध तबला वादक यशवंत वैष्णव प्रस्तुति देंगे। लहरा संगत कल्पतरु ठाकरे द्वारा की जाएगी।
यशवंत वैष्णव अपनी उत्कृष्ट लयकारी और तकनीकी स्पष्टता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में जन्मे यशवंत ने तीन वर्ष की आयु से तबला साधना प्रारंभ की। उन्हें संगीत नाटक अकादमी का ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान युवा पुरस्कार’, ‘बालश्री पुरस्कार’ तथा ‘संगीत शिरोमणि सम्मान’ जैसे प्रतिष्ठित अलंकरण प्राप्त हो चुके हैं। वर्तमान में वे पं. योगेश सामसी के मार्गदर्शन में अपनी कला को और निखार रहे हैं।
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर तथा आयोजकों कलाप्रेमियों का आह्वान द्वारा किया है कि इस अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर शास्त्रीय कला की इन विशिष्ट प्रस्तुतियों का आनंद लें।
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