द.म.क्षे.सांस्कृतिक केंद्र द्वारा सहभागी राज्यों में विविध कार्यशालाओं का आयोजन
शिल्पग्राम खजुराहो, म.प्र. में देशमिट्टी, बांबू एवं काष्ठ शिल्प कार्यशालाएं आयोजित
नागपुर में 26 दिसंबर 2025 से 20 दिवसीय लोह शिल्प कार्यशाला का शुभारंभ
नागपुर, 30 दिसंबर। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2025 एवं जनवरी 2026 के दौरान केंद्र के अंतर्गत सहभागी राज्यों मे विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है|
इस क्रम में 16 से 30 दिसंबर 2025 के दौरान मध्य प्रदेश के शिल्पग्राम खजुराहो मे मिट्टी शिल्प, बांबू शिल्प एवं काष्ठ शिल्प कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। इन कार्यशालाओ का उद्घाटन दिनांक 16 दिसंबर 2025 को दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर द्वारा किया गया| इस अवसर पर केंद्र के कर्मचारी एवं कलाकार उपस्थित थे|

"मिट्टी शिल्प कार्यशाला" मे मध्य प्रदेश के शिल्पकार धनीराम प्रजापति एवं समूह द्वारा मिट्टी शिल्प का निर्माण किया जा रहा है| इस कार्यशाला मे कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है| मिट्टी से भव्य मूर्तियों का निर्माण पारंपरिक तकनीकों का उपयोग कर हो रहा है| इस कार्यशाला मे मूर्ति निर्माण की प्रत्येक प्रक्रिया – मिट्टी की तैयारी से लेकर सूक्ष्म नक्काशी तक दर्शकों को भारतीय शिल्प परंपरा से रूबरू करा रही है|

"बांबू शिल्प कार्यशाला" मे मध्यप्रदेश के शिल्पकार श्री मोती बसोर एवं समूह द्वारा बांबू से सुंदर कलाकृतियों का निर्माण किया जा रहा है| इसमे बांबू की टोकरियाँ, लैम्प, सजावट का समान इत्यादि का समावेश है| बांस से बारीक नकाशीदार एवं मजबूत कलाकृतियों का निर्माण हो रहा है|

"काष्ठ शिल्प कार्यशाला" मे मध्यप्रदेश के शिल्पकार श्री गौरी शंकर एवं समूह द्वारा लकड़ियों पर बारीक नकाशी कर कलाकृति का निर्माण किया जा रहा है| कलाकारों द्वारा अपनी उत्कृष्ट कला का परिचय दिया जा रहा है|
इन सभी कार्यशालाओं में निर्मित कलाकृतियों से मध्य प्रदेश का शिल्पग्राम खजुराहो मनमोहक दिखाई दे रहा है। दर्शक शिल्पकारों की कला को बारीकी से देख रहे हैं तथा शिल्पों के बारे में जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं।
दिनांक 26 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर परिसर में भी एक लौह शिल्प कार्यशाला का आयोजन किया गया है| इस कार्यशाला मे बस्तर, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिध्द शिल्पकार श्री नंदलाल विश्वकर्मा द्वारा लोहे से पारंपरिक कलाकृति का निर्माण किया जा रहा है|
इन कार्यशालाओं का उद्देश्य भारतीय शिल्पकला परंपरा का संरक्षण करना तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करना है। ये सभी कार्यशालाएं केंद्र की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही हैं।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (04 मार्च 2026)