नागपुर, 7 जुलाई. ​रविवार को यहॉं राधाकृष्ण हॉस्पिटल में समृद्ध विदर्भ: समृद्ध भारत विषय द्वारा विदर्भ में विकास की संभावनाओं पर एक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया. पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त एवं सविसभा के अध्यक्ष धनंजय धार्मिक के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन विख्यात समाजसेवी व उद्योगपति गोविंद पोद्दार के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ. 

चर्चा के दौरान श्री पोद्दार ने अपने ​उद्बोधन में स्पष्ट किया कि देश में सबसे ज्यादा खनिज और भू संपदा विदर्भ में मौजूद है. इसके बावजूद इसकी गिनती देश के पिछड़े क्षेत्रों में होती है, यह बहुत चिंतनीय है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर विदर्भ समृद्ध होगा, तो भारत भी तेजी से समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ेगा. क्षेत्र के सांस्कृतिक, धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से भी नागपुर देश की राजधानी बनाए जाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शहर है.  

चर्चा के दौरान उपस्थि​त लगभग बीस लोगों ने इस बारे में अपने—अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए. वरिष्ठ राजनेता व समाजसेवी अजय(मुन्ना)महाजन ने कहा कि अगर किसान उचित तरीके से खेती करे तो उसे न किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत पड़ेगी, न ही कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने की. 

श्री धार्मिक ने मॉडल गॉंव प्रोजेक्ट की चर्चा करते हुए बताया कि अगर दूसरे गॉंव भी इससे प्रेरणा लेंगे तो क्षेत्र की तस्वीर बदलने में देर नहीं लगेगी. 

आर्किटेक्ट भगवान दास राठी ने अपील की कि सभी को बातचीत से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहिए. प्रताप काशीकर ने विदर्भ में टूरिज्म के बड़े पोटेंशियल के बारे में बताया कि अगर यहॉं पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाए तो इससे विदर्भ के आर्थिक व संरचनागत विकास को बहुत गति ​मिल सकती है. संगीता वाल्दे ने बताया कि उन्होंने बड़ी संख्या में किसानों को कृषि ऋण व सब्सिडी दिलाने में सहायता की है, जिससे उनके कार्य और उपज में काफी प्रगति हुई है. 

संजय कटकमवार ने कहा कि जहॉं प्रेम होता है, वहॉं अपराध नहीं होता. और इसके लिए आवश्यक है कि मन में अलगाव की भावना न पैदा हो. उन्होंने यह बात विदर्भ के संबंध में कही, जो सौतेले व्यवहार के चलते अलग—थलग महसूस करता है. वहीं कार्यक्रम का सार प्रस्तुत करते हुए राजीव देशपांडे ने अपने समापन भाषण में कहा कि हम सभी को संयुक्त रूप से इसके लिए प्रयास किए जाएं कि आम आदमी को अपनी बात कहने के पूरे अवसर मिलें, उसका कोई काम सिर्फ इसलिए न अटका रहे कि उसके पास कोई सिफारिश नहीं है, उसकी ऊपर तक पहुॅंच नहीं है.

इस अवसर पर मधुसूदन सारडा, दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, रितेश लोहिया, वसंत पारधी, मोहन खेतान, रामानंद राय, गजानन बाघमारे, पवन जाजोदिया, डॉ. नागेन्द्र, पांडुरंग डोमाजी धनवटे, डॉ. चंद्रा डोंगरवार, एड. गिरीश, गुंजन बटावला, डॉ.धीरज, डॉ. संदीप अग्रवाल, सहित क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे.