दुनिया पर टैरिफ लगाना सही ठहराने की ट्रंप की दलील खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ ने ट्रंप की ही मुसीबतें बढ़ा दी हैं. दूसरे देशों पर टैरिफ लगाते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि उनके पास कांग्रेस को दरकिनार करके विदेश से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार है. ट्रंप के इस दावे के बीच एक फेडरल अपील कोर्ट ने रोड़ा अटका दिया है. अदालत का कहना है कि संविधान ने टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को दिया है, लेकिन नेताओं ने धीरे-धीरे राष्ट्रपति को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
अमेरिका की संघीय सर्किट अपील कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करके दुनिया के लगभग हर देश पर अधिक टैरिफ लगाने को सही ठहराने की सारी हदें पार कर दी हैं. कोर्ट का यह फैसला न्यूयॉर्क की विशेष फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई के फैसले को काफी हद तक सही ठहराता है.
कोर्ट का फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका
कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था. इस फैसले से ट्रंप की अनिश्चित व्यापार नीतियों ने वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है, अनिश्चितता के कारण कारोबार ठप्प हो गया है, कीमतें बढ़ने लगीं और आर्थिक वृद्धि धीमी होने की चिंताएं पैदा हो गई हैं. बता दें कि कोर्ट का यह निर्णय ट्रंप की तरफ से अप्रैल में लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर था.
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप सरकार ने तर्क देते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके रिचर्ड निक्सन को भी आर्थिक संकट के दौरान आपातकाल के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति मिली थी. इस बात का जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा कि निक्सन ने यह कदम उस समय उठाया था जब उन्होंने डॉलर को सोने से जोड़ने वाली नीति को समाप्त किया था. न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने अपने फैसले में सुनाया था कि ट्रंप के लिबरेशन डे टैरिफ राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्ति के तहत दिए गए अधिकारों से बाहर हैं.
अमेरिका पर आ सकता है वित्तीय संकट
कोर्ट के शुक्रवार के फैसले में कुछ जजों के बीच असहमति भी दिखी. कोर्ट ने कहा कि 1977 का कानून आपातकालीन कदम उठाने की अनुमति नहीं देता है. सरकार की तरफ से दिए गए तर्क में कहा गया कि अगर ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ हटा दिए जाते हैं, तो उसे उन सभी टैरिफ को वापस करना होगा जो वह अब तक कई देशों से ले चुके हैं. सरकार ने बताया कि जुलाई का कुल राजस्व 159 अरब डॉलर था, जो पिछले साल के मुकाबले दो गुना अधिक था. साथ ही न्याय विभाग ने कानूनी दलील में चेतावनी देते हुए कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका में वित्तीय संकट आ सकता है और इससे ट्रंप को आगे चलकर टैरिफ लगाने में भी कठिनाई हो सकती है.
ट्रंप ने सभी टैरिफ को सही बताया
ट्रंप ने लंबे समय से चल रहे अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया. ट्रंप ने कांग्रेस की सहमति लिए बिना दावा किया कि उन्होंने यह टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल करके लगाया है, जो जोकि देश के हित में है. कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैरिफ सहित कर निर्धारित करने का अधिकार देता है, लेकिन सांसदों ने धीरे-धीरे राष्ट्रपतियों को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा, और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
कई देशों पर लगाए भारी कर
ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा करने के बाद इसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया ताकि देशों को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने का समय मिल सके. कुछ देशों ने ट्रंप का यह फैसला मान लिया, जिनमें यूके, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं. लेकिन कई देश ऐसे भी थे जिन्होंने जिसने ट्रंप के आगे अपने घुटने नहीं टेके. उन देशों को इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने अतिरिक्त टैरिफ लगाकर एक बड़ा झटका दिया, जिसमें लाओस (40%), भारत (50%), और अल्जीरिया (30%) हैं.
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