पाकिस्तान में 6 लाख फर्जी डॉक्टर कर रहे मरीजों का इलाज; रिपोर्ट
लाहोर। आर्थिक तंगी की मार झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan) की हालत इन दिनों बेहद खराब हो गई है। शहबाज शरीफ की सरकार बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने में तो नाकाम है ही, लोग यहां बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। हाल ही में यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में फर्जी और झोला छाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हालात ऐसे हैं कि देश भर में लाखों लोग बिना किसी कानूनी इजाजत के मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
रिपोर्ट में पाकिस्तानी मेडिकल एसोसिएशन और सिंध हेल्थकेयर कमीशन के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव अब्दुल गफ्फार शोरो ने बताया है कि पूरे पाकिस्तान में 6 लाख से ज्यादा फर्जी डॉक्टर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे लोग पहले किसी डॉक्टर के साथ काम करते हैं, थोड़ा बहुत सीखते भी नहीं हैं और अपनी क्लिनिक खोल लेते हैं।
महामारी करार
शोरो के मुताबिक फर्जी डॉक्टरों को दवाओं की सही खुराक और साइड इफेक्ट्स की जानकारी नहीं होती। गलत इलाज से मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। उन्होंने कहा कि ये लोग उपकरणों को ठीक से स्टरलाइज नहीं करते, सिर्फ पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल करते हैं। कई जगह सिरिंज भी दोबारा इस्तेमाल की जाती हैं, जिससे हेपेटाइटिस और एड्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने इसे पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में महामारी करार दिया है।
मरीजों की और बिगड़ जाती है हालत
गांव के एक निवासी अली अहमद ने बताया कि इलाके में कई ऐसी क्लिनिक हैं, जहां कोई भी योग्य डॉक्टर नहीं है। वहीं लोगों में शिक्षा की कमी है इसलिए वे असली और नकली डॉक्टर में फर्क नहीं कर पाते। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का सीधा असर पाकिस्तान की पहले से कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है। कराची के सिविल अस्पताल के प्रमुख खालिद बुखारी ने बताया कि उनके अस्पताल में देश भर से ऐसे मरीज पहुंचते हैं, जिनकी हालत फर्जी डॉक्टरों के गलत इलाज से खराब हो चुकी होती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल पहले से ही मरीजों से भरा हुआ है और ज्यादातर गंभीर मामले इन्हीं गलत इलाज का नतीजा होते हैं।
समाधान भी मुश्किल
सिंध हेल्थकेयर कमीशन के प्रमुख अहसन कवी सिद्दीकी ने माना कि इस समस्या को काबू में करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं। अगर 25 क्लिनिक बंद की जाती हैं तो अगले ही दिन 25 नई खुल जाती हैं। हाल ही में कराची में एक ऐसा बंगला सील किया गया, जो बिना रजिस्ट्रेशन के पूरे अस्पताल की तरह चल रहा था, जिसमें बच्चों और बड़ों के लिए आईसीयू तक थे। सिद्दीकी ने बताया कि देश का कानून कमजोर है। केस दर्ज होते हैं, लेकिन आरोपी अगले दिन जमानत पर छूट जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जांच टीमों को कई बार गंभीर सुरक्षा खतरे झेलने पड़ते हैं। कई इलाकों में टीमों को बंधक बना लिया जाता है और फायरिंग तक होती है।
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