'एआई के युग में फैक्ट-चेकिंग: डिजिटल-फर्स्ट दुनिया में दुष्प्रचार से मुकाबला' विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में नैतिक संचार और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से विश्वास निर्माण पर जोर

नागपुर, 21 जुलाई: भारत में बढ़ते दुष्प्रचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डिजिटल भ्रामक सूचनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई), जो देश के जनसंपर्क एवं संचार पेशेवरों का राष्ट्रीय संगठन है, ने राष्ट्रीय तथ्य सत्यापन समिति (नेशनल फैक्ट वेरिफिकेशन कमेटी) के गठन की घोषणा की।

समिति की घोषणा करते हुए पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक ने कहा, "विश्वास का निर्माण हमेशा से जनसंपर्क की आधारशिला रहा है। एआई के इस युग में तथ्य सत्यापन हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।"

वे पीआरएसआई अहमदाबाद चैप्टर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन 'एआई के युग में फैक्ट-चेकिंग: डिजिटल-फर्स्ट दुनिया में दुष्प्रचार से मुकाबला' को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन अहमदाबाद में शनिवार को अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी के सहयोग तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन एलुमनाई एसोसिएशन (आईआईएमसीएए) के समर्थन से आयोजित किया गया।

नवगठित समिति जिम्मेदार संचार को बढ़ावा देने, तथ्यों के सत्यापन को प्रोत्साहित करने, मीडिया साक्षरता को सुदृढ़ करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में फैल रही भ्रामक सूचनाओं के विरुद्ध देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाने की दिशा में कार्य करेगी।

इस समिति में संचार क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी सदस्य शामिल हैं। इनमें श्री उन्मेष दीक्षित, डॉ. रितु दुबे तिवारी, डॉ. निमिष कपूर, श्री विक्की शाह, डॉ. अर्चना कुमारी, सुश्री विशाखा काटेखाये, श्री संतोष झोकारकर, श्री मनीष हूजा तथा श्री उत्सव जैन शामिल हैं।

अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट डॉ. संजीव विद्यार्थी ने कहा, "एआई के युग में जिम्मेदार डिजिटल नागरिक तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच और मीडिया साक्षरता विकसित करनी होगी।"

मुख्य अतिथि डॉ. लवीना सिन्हा, आईपीएस, उप पुलिस आयुक्त (साइबर सुरक्षा), गुजरात पुलिस ने कहा, "साइबर जागरूकता ही दुष्प्रचार के खिलाफ हमारी सबसे मजबूत रक्षा है। विश्वास करने से पहले सत्यापन करें, साझा करने से पहले सोचें और एक जिम्मेदार डिजिटल समाज के निर्माण में योगदान दें।"

जानी टेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. कश्यप जानी ने कहा, "प्रौद्योगिकी प्रगति को गति दे सकती है, लेकिन उसका वास्तविक प्रभाव विश्वास पर निर्भर करेगा। जिम्मेदार नवाचार हमेशा सत्यापित जानकारी के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।"

सम्मेलन में विंग कमांडर अभिषेक कुमार तिवारी, जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रवक्ता, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. अजय उमट, ग्रुप एडिटर, नवगुजरात समय; तथा डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, ग्रुप एडिटर, नेटवर्क18 विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सम्मेलन के दौरान साइबर सुरक्षा, एआई द्वारा उत्पन्न दुष्प्रचार, डीपफेक, तथ्य सत्यापन तकनीक, संकट संचार, मीडिया नैतिकता और डिजिटल साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत, प्रौद्योगिकी मंचों और मीडिया संगठनों के बीच व्यापक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से नीति-निर्माता, सरकारी अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि, जनसंपर्क एवं संचार विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता तथा विद्यार्थी शामिल हुए। उन्होंने एआई आधारित दुष्प्रचार, डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और अन्य उभरती डिजिटल चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर पीआरएसआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (पश्चिम) श्री एस. पी. सिंह, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री उन्मेष दीक्षित, सचिव-कोषाध्यक्ष श्री दिलीप चौहान, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर. के. सिंह तथा श्री संतोष झोकारकर भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय (पीडीईयू) के जनसंचार विभाग के प्रोफेसर तथा आईआईएमसीएए के प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप मल्लिक ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में फर्जी समाचारों पर अंकुश लगाने तथा जागरूक एवं सूचित समाज के निर्माण के लिए मीडिया साक्षरता और तथ्य सत्यापन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।