33वाँ डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति संगीत समारोह अगले सप्ताह
29 से 31 जुलाई तक नागपुर में शास्त्रीय संगीत और संगीत नाटक की होंगी भव्य प्रस्तुतियाँ
नागपुर, 24 जुलाई 2026। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 33वाँ डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति संगीत समारोह का आयोजन 29 से 31 जुलाई 2026 तक डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति सभागृह, सिविल लाइंस, नागपुर में किया जाएगा। तीन दिवसीय समारोह में प्रतिदिन शाम 6.30 बजे देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों द्वारा शास्त्रीय गायन, वादन तथा संगीत नाटक की प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।

समारोह की जानकारी शुक्रवार को केंद्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपनिदेशक मिथिला तळवणेकर तथा सहायक निदेशक (कार्यक्रम) दीपक कुलकर्णी ने दी। इस अवसर पर लेखा एवं प्रशासनिक अधिकारी दीपक पाटिल भी उपस्थित थे। श्री कुलकर्णी ने बताया कि इस बार कलाकारों के चयन के दौरान केंद्र का प्रयास रहा है कि समारोह का स्वरूप शास्त्रीय व पारंपरिक होने के साथ—साथ युवा पीढ़ी को भी आकर्षित करने वाला हो।
शुभा मुदगल और निलाद्री कुमार से होगा आगाज़
समारोह का उद्घाटन 29 जुलाई (बुधवार) को होगा। पहले दिन की शुरुआत सुप्रसिद्ध गायिका पद्मश्री शुभा मुदगल के शास्त्रीय गायन से होगी। शुभा मुदगल अपनी बहुमुखी गायन शैली और गहन साधना के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने पंडित रामाश्रय झा 'रामरंग', पंडित जितेंद्र अभिषेकी, पंडित कुमार गंधर्व और नैना देवी जैसे महान गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें पद्मश्री, यश भारती सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
उद्घाटन दिवस की दूसरी प्रस्तुति प्रसिद्ध सितार वादक निलाद्री कुमार की होगी। उन्होंने अपने पिता एवं गुरु पंडित कार्तिक कुमार के मार्गदर्शन में मात्र चार वर्ष की आयु से संगीत साधना शुरू की। पारंपरिक सितार को नई पहचान देने और आधुनिक वाद्य 'ज़ितार' के सृजन के लिए वे विशेष रूप से जाने जाते हैं। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
दूसरे दिन मंचित होगा संगीत नाटक 'देवबाभळी'
30 जुलाई (गुरुवार) को मुंबई की भद्रकाली प्रोडक्शन्स द्वारा चर्चित मराठी संगीत नाटक 'देवबाभळी' प्रस्तुत किया जाएगा। इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन प्राजक्त देशमुख ने किया है, जबकि संगीत आनंद ओक का है। 800 से अधिक सफल मंचन कर चुके इस नाटक में पारंपरिक अभंग और आधुनिक प्रस्तुति शैली का प्रभावी संगम देखने को मिलता है। इसे अब तक 44 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
समापन दिवस पर रोनू मजूमदार और भरत बलवल्ली की प्रस्तुतियाँ
31 जुलाई (शुक्रवार) को समारोह के अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार के बाँसुरी वादन की होगी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता डॉ. भानु मजूमदार से प्राप्त की तथा आगे स्व. पंडित लक्ष्मण प्रसाद जयपुरवाले, पंडित विजय राघव राव और परमगुरु पंडित रवि शंकर के मार्गदर्शन में अपनी कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। भारतीय बाँसुरी को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सहित अनेक सम्मान मिले हैं। उनके नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है।
समारोह का समापन प्रतिष्ठित गायक एवं संगीतकार स्वराधीश डॉ. भरत बलवल्ली के शास्त्रीय गायन से होगा। उन्होंने मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की विशिष्ट गायकी को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका ग्रंथ 'रागोपनिषद' भारतीय शास्त्रीय संगीत के दुर्लभ रागों और परंपराओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। उन्हें मास्टर दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार, स्वातंत्र्यवीर सावरकर पुरस्कार, यशवंतराव चव्हाण पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कारवीर पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विद्याशंकर भारती स्वामी ने उन्हें 'स्वराधीश' की उपाधि से अलंकृत किया है।
केंद्र की निदेशक आस्था कार्लेकर ने संगीत प्रेमियों और कला रसिकों से इस प्रतिष्ठित समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।
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