महाकाल मंदिर जमीन विवाद पर BJP विधायक की सफाई, उमंग सिंघार का तीखा हमला
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर की जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि हरिफाटक इलाके में स्थित मंदिर पार्किंग की करीब 45 हजार वर्ग फीट बेशकीमती जमीन को बेहद शातिराना तरीके से पहले निजी घोषित किया गया और बाद में उसे आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय की कंपनी के नाम हस्तांतरित कर दिया गया। इस प्राइम लोकेशन वाली भूमि पर अब एक भव्य होटल निर्माण की योजना बनाई जा रही है। मामला सामने आने और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज होने के बाद आरोपी विधायक ने सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी सफाई पेश की है।
राजनीतिक साजिश और झूठा भ्रम: भाजपा विधायक
इन गंभीर आरोपों के घेरे में आए भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने मंगलवार, 19 मई को मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि जनता के बीच जानबूझकर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह जमीन महाकाल मंदिर की पार्किंग की है। विधायक का दावा है कि महाकाल मंदिर की वास्तविक भूमि इस विवादित स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है और उनके पास इस जमीन से जुड़े पिछले 75 वर्षों की पूरी सर्च रिपोर्ट और पुख्ता कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने साफ किया कि रजिस्ट्री पूरी तरह वैध है और कुछ राजनीतिक विरोधी अपनी रोटियां सेकने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं।
विपक्ष का तीखा हमला और भू-माफिया होने के आरोप
दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जो जमीन पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी और जिसका उपयोग श्रद्धालु वाहनों की पार्किंग के लिए कर रहे थे, उसे कौड़ियों के भाव 'यूटोपिया होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी को सौंप दिया गया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस निजी कंपनी के कर्ताधर्ताओं में सीधे तौर पर भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय शामिल हैं, जो यह साबित करता है कि धार्मिक स्थलों की जमीनों पर किस तरह रसूखदारों का कब्जा करवाया जा रहा है।
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